"तस्वीर भेजा कर"
गुल-ए-उम्मीद है बाक़ी
मुझे तस्वीर भेजा कर
तबीयत ठीक है मेरी
मुझे तस्वीर भेजा कर
ये कैसी आज़माइश है
मिटा लो रब्त जाने से
मैं ख़ुश क्यूँ हो नहीं सकता
तेरी बस याद आने से
तेरा हिस्सा रहा मुझ में
हिफ़ाज़त से ज़माने से
ग़मों से पार पाया है
ग़मों में मुस्कुराने से
छुपा लूँ अश्क पढ़ लूँ मन
मुझे तस्वीर भेजा कर
मैं तब तक थाम लूँ धड़कन
मुझे तस्वीर भेजा कर
— Shubham Nankani















