dua poori nahin hoti vahaañ nazren jamaane se | दुआ पूरी नहीं होती वहाँ नज़रें जमाने से

  - Sohil Barelvi

दुआ पूरी नहीं होती वहाँ नज़रें जमाने से
कहीं भी कुछ नहीं होता सितारे टूट जाने से

नज़र को हम उठा कर के भला देखें नज़ारे क्या
हमें फ़ुर्सत नहीं मिलती कभी आँसू बहाने से

शबाहत देख कर मेरी ये मुझ से आइना बोला
यही सूरत नहीं भूली वो लड़की इक ज़माने से

ये पतझड़ लौट आएगा भरी अपनी जवानी पर
बहारें लौट आएँगी तुम्हारे लौट आने से

मेरी दुनिया बड़ी दिलकश यहाँ अपने नज़ारे हैं
यहाँ पर हिज्र के मौसम भी लगते हैं सुहाने से

चलो सोहिल ख़ुदा के घर तुम्हारा वक़्त आया है
मुझे दुनिया नज़र आई यही इल्हाम आने से

  - Sohil Barelvi

Shaheed Shayari

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