ek din dil jaan se sab par bharosa ho gaya | एक दिन दिल जान से सब पर भरोसा हो गया

  - Sohil Barelvi

एक दिन दिल जान से सब पर भरोसा हो गया
दुश्मनों के बीच मैं बिल्कुल निहत्था हो गया

क़ातिलों की नींद उड़ती जा रही है इन दिनों
बाद मरने के मैं हर धड़कन में ज़िंदा हो गया

रौशनी ही रौशनी थी दूर तक देखो जहाँ
तू गया क्या यार हर-सू बस अँधेरा हो गया

जा-ब-जा आती नज़र अब लाज लुटती प्रेम की
क्यूँँ हवस की आग में हर शख़्स अंधा हो गया

चार दिन से बस उदासी बस उदासी साथ है
यूँँ समझ लो दोस्त से तुम यार झगड़ा हो गया

एक पर वो किस तरह मौक़ूफ़ रहता साल भर
चार दिन की चाँदनी में जो सभी का हो गया

चारागर भी लग गए सब अपने दूजे काम से
दीदस तेरी तेरा बीमार अच्छा हो गया

  - Sohil Barelvi

Chehra Shayari

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