meri manzil ka raasta mujh ko | मेरी मंज़िल का रास्ता मुझ को

  - Sohil Barelvi

मेरी मंज़िल का रास्ता मुझ को
एक पंछी दिखा रहा मुझ को

उस नगर से किया जुदा मुझ को
कोई अपना नहीं रहा मुझ को

तेरे पहलू से ख़ूब भटकाया
मेरी किस्मत ने जा-ब-जा मुझ को

हादसा ये भी कुछ जुदा सा है
बुझता दीपक जला रहा मुझ को

एक रिश्ता तबाह कर डाला
शक की दीमक ने खा लिया मुझ को

बाद जाने के आप के मिलता
हू-ब-हू कोई आप सा मुझ को

हाए पहचानता नहीं सोहिल
अब तो घर का भी आइना मुझ को

  - Sohil Barelvi

Shama Shayari

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