saath waalon ko yahaañ par yuñ akela chhod kar | साथ वालों को यहाँ पर यूँँ अकेला छोड़ कर

  - Sohil Barelvi

साथ वालों को यहाँ पर यूँँ अकेला छोड़ कर
आप तन्हा हों न जाएँ साथ सब का छोड़ कर

दूर से हर एक चेहरा लगता है अपना मगर
आप भी चल ही दिए ना साथ मेरा छोड़ कर

याद हम ही आएँगे उस वक़्त तुम को बारहा
जब चला जाएगा कोई तुम को अपना छोड़ कर

उस के मैं नज़दीक इतने आ गया हूँ आज कल
सब नज़र आता है मुझ को उस का चेहरा छोड़ कर

घर में आया तो उदासी रूठ कर कहने लगी
इस तरह जाते नहीं हैं घर का दर वा छोड़ कर

इन लबों से एक दिन तुम ही कहोगे देखना
कोई हम को मिल न पाया आप जैसा छोड़ कर

एक मुद्दत साथ अपने रहते-रहते थक गई
अब उदासी जा रही है घर हमारा छोड़ कर

बात मेरी मानिए या पूछिए सय्याद से
कोई पंछी ख़ुश नहीं है आज पिंजरा छोड़ कर

चलने वाले की भी 'सोहिल' अपनी मर्ज़ी होती है
रेख पर चलता है कोई, कोई रस्ता छोड़ कर

  - Sohil Barelvi

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