एक दूजे का ग़म नहीं समझे
एक दूजे को हम नहीं समझे
'इश्क़ आसाँ नहीं मगर अब तक
जितना समझे हैं कम नहीं समझे
अच्छे लगते हो आप सब लोगों
हम को अपने सनम नहीं समझे
हम ने फिर से गँवा दिया मौक़ा'
आप के फिर सितम नहीं समझे
मेरा दिल बैठता गया लेकिन
तुम ने जाते क़दम नहीं समझे
ज़िंदगी भर रहा हमें अफ़सोस
ज़िंदगी को अहम नहीं समझे
मैं वही होनहार हूँ जिस को
वक़्त पर मोहतरम नहीं समझे
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