गए दिनों की मोहब्बतों को
सऊबतों को
अज़िय्यतों को सँभाल रखना
कि आने वाले किसी भी लम्हे में
ख़्वाब आँखों से छिन गए तो
मोहब्बतों को
सऊबतों को
अज़िय्यतों को
बसा के आँखों में
ज़िंदगी को तलाश करना
— Tahir Hanfi
सऊबतों को
अज़िय्यतों को सँभाल रखना
कि आने वाले किसी भी लम्हे में
ख़्वाब आँखों से छिन गए तो
मोहब्बतों को
सऊबतों को
अज़िय्यतों को
बसा के आँखों में
ज़िंदगी को तलाश करना
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