आज सूरज ग़ुरूब होने तक
छोड़ आना उसे बिछौने तक
देखना नींद उस को आ जाए
जागते रहना उस के सोने तक
अपने पैरों के बल खड़ी हूँ मैं
हाथ जाता नहीं खिलौने तक
फूल है तू मैं पत्ती पत्ती हूँ
तेरा होना है मेरे होने तक
— Tajdeed Qaiser
छोड़ आना उसे बिछौने तक
देखना नींद उस को आ जाए
जागते रहना उस के सोने तक
अपने पैरों के बल खड़ी हूँ मैं
हाथ जाता नहीं खिलौने तक
फूल है तू मैं पत्ती पत्ती हूँ
तेरा होना है मेरे होने तक
Other ghazal from the same pen
Shers of sooraj.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling