भटका हूँ तब से मौत के ही मायाजाल में
मिलने किसी को जब से गया अस्पताल में
लोगो ने मेरा हाल भी पूछा तो कितनी बार
तैंतीस बार भी नहीं तैंतीस साल में
हर कोई है मुशायरे में मुझको छोड कर
प्रसाद ही नहीं रखा पूजा के थाल में
जिस रास्ते पे भीड़ हो वो रास्ता न चुन
मंज़िल नहीं मिलेगी कभी भेड़-चाल में
आसान शेर कहने की कोशिश करो तनोज
वो शेर ही बड़ा है जो है बोल चाल में
— Tanoj Dadhich















