मैं भी निकला घर से पछता लेने
ग़म से ही ग़म का घर लुटवा लेने
ज़ालिम है घर वाले मेरे, मत आ
मत आ मेरे आशिक़, चाँटा लेने
हम भी दिल हारे बैठे है जानम
आना तो होगा ही ख़तरा लेने
घर वालों ने तेरे इज़्ज़त तो दी
क्या कहता मैं, आया धोखा लेने
उनको तो मैं तेरा दुल्हा लगता
जो आया दुल्हन से रुसवा लेने
जाने जाॅं तुम वापस मत आ जाना
अब मुझ सेे फिर कोई वा'दा लेने
बोला था मत आना, फिर क्यूँ आए
चाहत है वापस, या बदला लेने
'राही' के दिल में ख़ंजर दे कर
आई हो क्या झगड़े सुलझा लेने ?
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