मेरी उजड़ी है दुनिया कौन देखेगा
ग़म-ए-दिल का तमाशा कौन देखेगा
सभी खोए रहेंगे गर उजालों में
मेरे दिल का अँधेरा कौन देखेगा
नज़ारे ख़ूबसूरत हैं बहुत लेकिन
ख़ुदाया इनको तन्हा कौन देखेगा
तुम्हारे साथ ही सब ख़त्म कर देंगे
तुम्हारे बाद दुनिया कौन देखेगा
पुरानी दुनिया में लगता नहीं है दिल
नई दुनिया का सपना कौन देखेगा
सभी गुम होते जाएँगे अँधेरे में
तो दुनिया का उजाला कौन देखेगा
सभी को चाँद हो जाएगा हासिल दोस्त
तो ये टूटा सितारा कौन देखेगा
ज़वानी तक ही देगी साथ वो मेरा
तो फिर मेरा बुढ़ापा कौन देखेगा
सभी को 'इश्क़ हो जाएगा हासिल तो
तेरे दर को ख़ुदाया कौन देखेगा
मैं अक्सर राह चलते सोचता हूँ ये
अब उनका आना जाना कौन देखेगा
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