सिसकते नहीं क्या वहाँ के परिंदे
चहकते नहीं क्या यहाँ के परिंदे
कहाँ आब-ओ-दाना कहाँ आशियाना
कहाँ आ बसे हैं कहाँ के परिंदे
रहेंगे भी तो साथ कब तक रहेंगे
ज़मीं के हैं पेड़ आसमाँ के परिंदे
क़फ़स का है छोटा बड़ा दाइरा बस
क़फ़स में हैं सारे जहाँ के परिंदे
— Ananth Faani















