शह को हम मात कर नहीं पाए
इतनी ख़ैरात कर नहीं पाए
आप से राब्ता बस इतना है
क़त्ल जज़्बात कर नहीं पाए
और भी दर्द थे ज़माने के
इश्क़ दिन-रात कर नहीं पाए
गुफ़्त-ओ-गू उम्र भर चली लेकिन
काम की बात कर नहीं पाए
तुम ने वो कर दिया है जो अब तक
बिगड़े हालात कर नहीं पाए
बिछड़े कुछ यूँ कि ज़िंदगी भर फिर
हम मुलाक़ात कर नहीं पाए
दिल की दिल में ही रह गई "हैदर"
कुछ शिकायात कर नहीं पाए
— Haider Khan















