तू न होगा तो ये ज़हमत भी चली जाएगी
रफ़्ता रफ़्ता तेरी आदत भी चली जाएगी
तू मुझे ग़ैर समझ कर ही सही बात तो कर
लब खुलेंगे तो अदावत भी चली जाएगी
तुझ को जाते हुए देखा तो समझ ये आया
तुझ को खोने की ये वहशत भी चली जाएगी
एक इसी ख़ौफ़ से इज़हार-ए-मोहब्बत न किया
तुझ से मिलने की सहूलत भी चली जाएगी
ये न सोचा था कभी मैं ने कि इक दिन हैदर
इश्क़ में इश्क़ की लज़्ज़त भी चली जाएगी
— Haider Khan















