और तो कुछ कहानी नहीं
बस यही वो हमारी नहीं
वो ख़ुशी कुछ ख़ुशी ही नहीं
जिस ख़ुशी में, तुम्हारी नहीं
बह गई आँख से आग ये
यूँ न छेड़ो ये पानी नहीं
ज़िंदगी है ख़ुशी और ग़म
ग़म बिना तो ख़ुशी ही नहीं
पूछ लूँ जब उसे, क्या किया?
तो कहे कुछ नहीं भी नहीं
— Toyesh prakash















