बेचकर पेट दिल के निवाले हुए
या'नी बाज़ार से हम निकाले हुए
रंग काला जुदा लोग हैं और हम
दिल को बाज़ार में हैं उछाले हुए
हम तड़पते रहे रौशनी के लिए
नेत्र मेरे जो फूटे उजाले हुए
— Trinetra Dubey
या'नी बाज़ार से हम निकाले हुए
रंग काला जुदा लोग हैं और हम
दिल को बाज़ार में हैं उछाले हुए
हम तड़पते रहे रौशनी के लिए
नेत्र मेरे जो फूटे उजाले हुए
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