घड़ी भी नहीं थी रुकी रोकने से
मगर रुक गई है तिरे लौटने से
मुझे मार डाला सुना कर के ता'ने
नहीं हम मरे तर्जनी देखने से
न सोचो कि क्या हो गया इश्क़ में ये
बढ़ा दर्द ही है अधिक सोचने से
— Trinetra Dubey
मगर रुक गई है तिरे लौटने से
मुझे मार डाला सुना कर के ता'ने
नहीं हम मरे तर्जनी देखने से
न सोचो कि क्या हो गया इश्क़ में ये
बढ़ा दर्द ही है अधिक सोचने से
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