kisi ko yaad men rakhna kisi ki yaad men aanaa | किसी को याद में रखना किसी की याद में आना

  - Umrez Ali Haider

किसी को याद में रखना किसी की याद में आना
ये भी है ज़िन्दगी का सच हर इक रूदाद में आना

ख़िज़ाँ का यूँँ चले जाना बहार-ए-नौ के आने पर
ये बिल-आख़िर अलामत है चमन का माद में आना

वही शाही वही दौराँ ज़माने में चले कब तक
कि सुलतानी ज़रूरी तो नहीं शहज़ाद में आना

जहाँ तुमको बनाना है महल अपना बनाओ तुम
मगर लाज़िम है संग-ओ-ख़िश्त का बुनियाद में आना

सुनो बातिल मेरा ईमाँ फ़क़त है क़लमा-ए-तौहीद
डरा सकता नहीं मुझको तिरा तादाद में आना

सभी को है पड़ी अपनी कहाँ होता किसी से भी
यहाँ अब तो ज़रूरतमंद के इमदाद में आना

कहाँ लिक्खी ग़ज़ल मैंने कि लिक्खी ज़िंदगी अपनी
कभी सोचा कहाँ था मैं तुम्हारी दाद में आना

मिलेगा क्या ज़माने को ख़सारे के सिवा हैदर
गवारा क्यूँ करे कोई चमन बर्बाद में आना

  - Umrez Ali Haider

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