zindagi sar-basar nahin hoti | ज़िन्दगी सर-बसर नहीं होती

  - Umrez Ali Haider

ज़िन्दगी सर-बसर नहीं होती
जब तलक मौत गर नहीं होती

फ़ायदे हैं तिरे बहुत लेकिन
कोई शय बे-ज़रर नहीं होती

कब सफ़र ज़िन्दगी का भारी है
चश्म-ए-तर जब गुहर नहीं होती

बेबसी आख़िर उसकी क्या होगी
चिड़िया जिस के भी पर नहीं होती

रौशनी जब कभी निकलती है
रौशनी फिर किधर नहीं होती

जब पसीने बहाए उसने फिर
क्यूँ क़बा तर-बतर नहीं होती

तेरी यादें कहाँ–कहाँ जाए
दम-ब-दम रह-गुज़र नहीं होती

ख़्वाहिश-ए-बाल-ओ-पर नहीं है गर
जुम्बिश-ए-बाल-ओ-पर नहीं होती

जब ये शोला–दरून फटता है
ज़ीस्त फिर क्यूँ शरर नहीं होती

रोज़ मैं दिल के परचे पढ़ता हूँ
बज़्म-ए-दिल है कि सर नहीं होती

ख़ूब है ज़िन्दगी जहाँ "हैदर"
ख़ूब से ख़ूब–तर नहीं होती

  - Umrez Ali Haider

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