मैं हूँ पागल ये मानता हूँ मैं
एक बिखरी हुई फ़ज़ा हूँ मैं
खोने का तुझ को अब नहीं है डर
जा तुझे यार छोड़ता हूँ मैं
दिल मिरा अपना क़त्ल कर बैठा
इस जगह उस जगह लुटा हूँ मैं
तू उसे कहना जा के ऐ क़ासिद
अब उसे भी भुला रहा हूँ मैं
वो गई छोड़ के हुए बरसों
जाने क्यूँ उस जगह खड़ा हूँ मैं
उस को भी देखा है दुआ करते
वो जो ये कहता था ख़ुदा हूँ मैं
हरकतें जानता था मैं उस की
उस का दुख अब मना रहा हूँ मैं
उस ने जब इश्क़ में दिया धोखा
तब कहीं नींद से उठा हूँ मैं
— Vaseem 'Haidar'















