अपने पाले में मुक़द्दर तो नहीं आ सकताहिज्र की शब वो मेरे घर तो नहीं आ सकतादेखने वाले तेरी दीद के सदके लेकिनकोई तस्वीर से बाहर तो नहीं आ सकताआप जो ठीक समझते हैं वो करिए साहबऐसे मौसम में मैं दफ़्तर तो नहीं आ सकता— Vashu Pandey