jo tu nahin to ye duniya ruki-ruki si lage | जो तू नहीं तो ये दुनिया रुकी-रुकी सी लगे

  - Vijendra Singh Parwaaz

जो तू नहीं तो ये दुनिया रुकी-रुकी सी लगे
मैं अपनी शक्ल भी देखूँ तो अजनबी सी लगे

तिरे ख़याल से बढ़ कर कोई ख़याल नहीं
अंधेरे घर में मुझे कैसी रौशनी सी लगे

जो तेरे रूप का चर्चा करूँँ बहारों से
तो फूल फूल की रंगत उड़ी उड़ी सी लगे

जो तेरी बाहों में दम तोड़ना मुयस्सर हो
तो मुझ को मौत की आमद भी ज़िंदगी सी लगे

किसी के हुक्म का पाबंद हो के क्या पाया
के अब तो साँस भी आए तो ख़ुद-कुशी सी लगे

तमाम 'उम्र ये सोचा है शे'र कहते हुए
हमारी शाइ'री 'पर्वाज़' शाइरी सी लगे

  - Vijendra Singh Parwaaz

Ujaala Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Vijendra Singh Parwaaz

As you were reading Shayari by Vijendra Singh Parwaaz

Similar Writers

our suggestion based on Vijendra Singh Parwaaz

Similar Moods

As you were reading Ujaala Shayari Shayari