बंदा तो हुज़ूर आप के काम आया बहुत है

ये भी है बजा आप ने ठुकराया बहुत है

उल्फ़त है कि है दिल-लगी मुझ को नहीं मालूम
फिर चाँद मुझे देख के मुस्काया बहुत है

दुनिया मुझे सूली पे चढ़ा दे तो चढ़ा दे
उल्फ़त का सबक़ मैं ने भी दोहराया बहुत है

ये बात बजा की है मदद शुक्रिया साहिब
एहसान मगर आप ने जतलाया बहुत है

गुम-सुम सा कई रोज़ से दिखता है वो ज़ालिम
शायद मिरा दिल तोड़ के पछताया बहुत है

ख़ुद की भी कभी शक्ल ज़रा देख लें साहिब
आईना मुझे आप ने दिखलाया बहुत है

अब अक़्ल का दुश्मन जो न समझे तो न समझे
मैं ने दिल-ए-नादान को समझाया बहुत है

अफ़्सोस नहीं क़त्ल का मुझ को मिरे क़ातिल
ग़म है यही तू ने मुझे तड़पाया बहुत है

ईमान ओ धरम ताक पे देखो तो 'अकेला'
पैसे के लिए आदमी पगलाया बहुत है

— Virendra Khare Akela

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