तेरे पैकर का नक़्शा देखना है
कि ये गुल मैं ने खिलता देखना है
नज़र-अंदाज़ कर मुझ को कि मैं ने
तेरा नज़रें चुराना देखना है
बचा के आँसू रख अपने कि उस को
किसी के साथ हँसता देखना है
गुज़ारेंगे इसी दुख में जवानी
तुम्हारे बिन बुढ़ापा देखना है
बहुत सी चीज़ें हैं मंज़र में लेकिन
तेरे होते हुए क्या देखना है
जहाँ वालों को जन्नत देखने दो
मुझे तो घर तुम्हारा देखना है
मेरी आँखें धड़कना चाहती हैं
तेरी जानिब दोबारा देखना है
— Viru Panwar Viyogi















