hazaaron dukh pade sahna mohabbat mar nahin sakti | हज़ारों दुख पड़ें सहना मोहब्बत मर नहीं सकती

  - Wasi Shah

हज़ारों दुख पड़ें सहना मोहब्बत मर नहीं सकती
है तुम से बस यही कहना मोहब्बत मर नहीं सकती

तिरा हर बार मेरे ख़त को पढ़ना और रो देना
मिरा हर बार लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती

किया था हम ने कैम्पस की नदी पर इक हसीं वा'दा
भले हम को पड़े मरना मोहब्बत मर नहीं सकती

पुराने अहद को जब ज़िंदा करने का ख़याल आए
मुझे बस इतना लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती

वो तेरा हिज्र की शब फ़ोन रखने से ज़रा पहले
बहुत रोते हुए कहना मोहब्बत मर नहीं सकती

गए लम्हात फ़ुर्सत के कहाँ से ढूँड कर लाऊँ
वो पहरों हाथ पर लिखना मोहब्बत मर नहीं सकती

  - Wasi Shah

Udas Shayari

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