कितना गोरा रंग है उस का कितना काला दिल उस का
लड़ते हैं सब आपस में जिस जिस ने देखा तिल उस का
और किसी से होती थीं जी भर कर रातों बातें और
इक हम ही पागल थे जो भरते थे फोन का बिल उस का
ये भी सच है मुझ को गाँव से घर से निकलवाने में बस
मेरा दिल तो था ही और दिमाग़ भी था शामिल उस का
कितने ही दिल टूटे थे कितने ही जान गँवा बैठे
रश्क से मर जाते है हम तो इश्क़ भी है क़ातिल उस का
हम तो पागल हैं साहिब जो उस के इश्क़ में पागल हैं
समझाया था रक़ीब को बाक़ी तो मुस्तक़बिल उस का
— Anuj Vats














