हम जानते हैं क्या वो लिखेंगे जवाब में
दिखते कई दिनों से है ख़त मेरे ख़्वाब में
ये जावेदाँ नहीं है नशा इश्क़ विश्क़ का
मैं इस लिए भी डूबा हूँ यक्सर शराब में
क्यूँ लोग डूब जाते हैं सब भूल भाल के
किस ने भला उतारा है दरिया किताब में
आया है ज़िंदगी के पहाड़े में इतना दुख
मुझ से हुई तो है कोई ग़लती हिसाब में
हम ने सुना है माँगती है आईफ़ोन अब
पहले तो मान जाती थी बस इक गुलाब में
कोई निकालो गर्दि- ए-अय्याम से मुझे
दम घुट रहा है ज़िंदगी के इस अज़ाब में
ग़ुस्से से देखा उस ने मुझे तो पता चला
शबनम के साथ शो'ला भी है माहताब में
— Anuj Vats















