पलकों से ही देखो इशारे हो गए
पल भर में ही हम तो तुम्हारे हो गए
ऐसी हवा चलने लगी थी इश्क़ की
दिन मुफ़्लिसी के भी ये प्यारे हो गए
हम से छुपा कर बैठे हैं चेहरा तिरा
गेसू तिरे दुश्मन हमारे हो गए
वो पास मेरे बैठी तो मुझ को लगा
बैठे ही बैठे सब नज़ारे हो गए
उस ने घटाएँ बाँध ली हैं ज़ुल्फ़ में
मौसम सुहाने अब तो सारे हो गए
आँखों पे उस की बस लिखी थी इक ग़ज़ल
हम से ख़फ़ा अब चाँद तारे हो गए
क्या क्या नहीं हो सकता इस दुनिया में यार
देखो न तुम भी तो हमारे हो गए
तेरा गया क्या इश्क़ में ओ बे-वफ़ा
पागल कई माँ के दुलारे हो गए
— Anuj Vats















