लिखे हैं माँ ने कुछ ख़त यारो
टपक रही घर की छत यारो
दुख मेरे समझाओ उस को
पीछे पड़ी मोहब्बत यारो
रस्सी चाक़ू सब रक्खे हैं
कहाँ से लाऊँ हिम्मत यारो
चोरों में हम चोर ही अच्छे
भाड़ में जाए जन्नत यारो
टूटे दिल को छोड़ो अब तो
घर की करो मरम्मत यारो
मर्द के भी सौ दुख होते हैं
कब समझेगी औरत यारो
— Anuj Vats















