Anish Gumber

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Anish Gumber shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anish Gumber's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
कहते हो तुमने रूह देखीं जिस्म का ख़ाका नहीं देखा
क्या देखा फिर देखा जो आँखों में सहरा नहीं देखा

हिज्र में हो मिली क़ुर्बत जिनको आशिक़ सच्चे होते है
वस्ल को हो पागल जो हो वो आशिक़ सच्चा नहीं देखा

पक्के घर में रहने वालों के दिल कच्चे देखे है
घर कच्चे में रहने वालों का दिल कच्चा नहीं देखा

धागा टूटते देखा है देखा है जुड़ते बार कई
पर जुड़ने के बाद कभी वो धागा सीधा नहीं देखा

माँ मेरी को मैंने अपने सामने जाता देखा है
औ तुम कहते हो के मैंने जाता अपना नहीं देखा

देखा है खुली आँखों से इक सपना तुमसे मिलने का
नींद में आयें सपने को तो होते पूरा नहीं देखा
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Anish Gumber
हो! तो उड़ते हुये पंछी सी क़िस्मत हो
न हो तो, तोड़ने की पिंजरा जुर्रत हो

मुहब्बत हो, इबादत हो, अदावत हो
उसूलों की, हमेशा ही, हिफ़ाज़त हो

अलावा तेरे उसको कोई सूझे नई
के तेरे प्यार में, इतनी तो, ताक़त हो

गले लगकर के रोना चाहता हूँ मैं
अगर जानां मुझे इतनी, इजाज़त हो

मिले अश्क़ो के बदले में सुकूँ मुझको
मुहब्बत में कोई ऐसी, तिजारत हो

नशा दूजा भला उस पर चढ़ेगा क्यूँ ?
नशे तेरे की जिसको जानां, आदत हो

मैं चाहूँ छोड़ना पर छूटता वो नई
लगी उसकी मुझे जैसे, कोई लत हो

वो सोये कैसे, कैसे चैन पाये वो ?
जिसे सपनो में भी तेरी ही, हसरत हो
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मुझे मुझसे ज़्यादा कोई चाहे, ऐसा नहीं चाहता था
फ़क़त चाहता था के चाहे वो, ज़्यादा नहीं चाहता था

लगा ली है उम्मीदें इतनी, के पूरी करूँगा मैं कैसे
थी चाहत के बस दिल लगायें, मैं ज़्यादा नहीं चाहता था

लगा मरना आसान उसको, किसी और की होने से ज़्यादा
मैं था चाहता वो मेरी हो, मैं वादा नहीं चाहता था

वो तो नाम उसका था आया तो नम हो गयी आँखें वरना
क़सम वाली ही बात है ग़म बताना नहीं चाहता था

लड़ाई हो झगड़े हो रूठे भी कोई मनायें भी कोई
फ़क़त चाहा था इश्क़ पूरा अधूरा नहीं चाहता था

जला कर के तस्वीर उसकी जलाया था फिर हाथ अपना
थी इकलौती उसकी निशानी, मिटाना नहीं चाहता था

सलामत रहें वो क़यामत तलक़ बस यही तो था चाहा
क़यामत तलक़ वो हो जाये अकेला नहीं चाहता था
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