Jagveer Singh

Top 10 of Jagveer Singh

    कभी दुख के मारे कभी शाद में
    ये आँखें तरसती तेरी याद में

    जो शाइ'र ग़म-ए-हिज्र से बच गया
    उसे मुफ़लिसी खा गई बा'द में

    दुखी होनी थी तेरी बेटी कभी
    ज़मीं पैसा ही देखा दामाद में

    मेरी रूह में ऐसे उर्दू बसी
    बसे माँ का दिल जैसे औलाद में

    तवज्जोह मिले इस सुख़न को बहुत
    अमाँ वक़्त लगता है ईजाद में

    महज़ पेट भरती है मेरी पगार
    सुकूँ मिलता है मुझ को बस दाद में

    मेरी शा'इरी डगमगा जाती है
    तेरी याद आती है तादाद में

    मोहब्बत में आबाद का सुख नहीं
    मोहब्बत का है लुत्फ़ बर्बाद में

    तरीक़े लगाए थे काफ़ी मगर
    वो हर बार बोली नहीं बा'द में

    लगा दिल परिंदे का सय्याद से
    लगा सारा ही दश्त फ़रियाद में
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    Jagveer Singh
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    शे'र कहने अलावा मेरे हाथ
    एक बूढ़े की बैसाखी भी है
    Jagveer Singh
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    पढ़े हैं शे'र तेरे गेसू पर मैं ने
    मेरे शानों को हक़ है बिखरे ये इन पर
    Jagveer Singh
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    करूँ ता'रीफ़ जितनी मैं तेरे फ़न पर
    महकती उतनी ख़ुशबू मेरे ही तन पर

    बड़ा बेज़ार दुख है ये मोहब्बत भी
    हमारा दिल भी आया तो सुहागन पर

    तू इतना भी सजा मत कर कि तुझ को छोड़
    नज़र जा मेरी ठहरे तेरे कंगन पर

    मोहब्बत की भला अब उम्र ही क्या है
    कि तोहफ़े लौटा दो थोड़ी सी अनबन पर

    तेरा ये बोलना बस मन नहीं है आज
    ज़रा तो सोच क्या गुज़री मेरे मन पर

    गवाही दे रहा था मैं मुख़ालिफ़ में
    मगर पूछा पुलिस ने हाथ रख गन पर

    तुम्हें तो मैं समझ बैठा था काफ़ी कुछ
    मगर तुम भी मरे तो सिर्फ़ इक धन पर

    तू भी तो मुस्कुरा कर ग़म छुपाती है
    गई है तू भी मेरे दिल के आँगन पर
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    Jagveer Singh
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    बज़्म में हम तेरी कुछ यूँ आए हैं
    दश्त से जूँ लौट मजनूँ आए हैं

    रब्त था मंसूब बस यारी तलक
    आप फिर दिल तक मेरे क्यूँ आए हैं
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    Jagveer Singh
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    सच को बताया जाता है
    बातिल बनाया जाता है

    सब इक तरह सा बोलते
    सब को सिखाया जाता है
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    Jagveer Singh
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    यारों नेताओं की बेटी है ये मुहब्बत
    सारी क़स
    में झूठी सारे वादे झूठे

    यार बिना आधी दुनिया लक़वा लगती है
    जग रूठे तो रूठे जिगरी यार न रूठे
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    Jagveer Singh
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    ग़लती से क्या ही उस गली निकले
    फिर तो अरमान कितने ही निकले

    घर से निकले थे काम से कोई
    काम ही काम फिर कई निकले

    तेरे चक्कर में इतने रह गए हम
    दूध से जितना यार घी निकले

    इक नजूमी ने देख मेरा हाथ
    बोला, औरत की तो कमी निकले

    तेरे कूचे से निकले कुछ लौंडे
    है ये हैरत, बड़े दुखी निकले

    कोई सुनता नहीं है सड़कों पर
    भले ही कोई चीख़ती निकले

    महज़ ये तेरे लम्स की तासीर
    कि छुअन से ही शाइ'री निकले

    सब ने बोला सही नहीं है वो
    सब के सब पूरे ही सही निकले

    याद आते हैं जब भी गुज़रे दिन
    साथ में आँसू और हँसी निकले

    नहीं थी तुम से औरों सी उम्मीद
    ख़ैर, तुम भी मगर वही निकले
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    Jagveer Singh
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