Ganesh Bihari Tarz

Ganesh Bihari Tarz

@ganesh-bihari-tarz

Ganesh Bihari Tarz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ganesh Bihari Tarz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
कितने जुमले हैं कि जो रू-पोश हैं यारों के बीच
हम भी मुजरिम की तरह ख़ामोश हैं यारों के बीच

क्या कहें किस ने बहारों को ख़िज़ाँ-सामाँ किया
देखने में तो सभी गुल-पोश हैं यारों के बीच

ये भी सच है घर के भेदी ने किया घर को तबाह
ये भी लगता है कि सब निर्दोश हैं यारों के बीच

क्या पता कब ख़ून का प्यासा यहाँ हो जाए कौन
यूँ तो कहने को सभी मय-नोश हैं यारों के बीच

हाँ चला अब साक़िया जादू भरी नज़रों के तीर
हम भी देखें किस क़दर ज़ी-होश हैं यारों के बीच

बज़्म-ए-याराँ है ये साक़ी मय नहीं तो ग़म न कर
कितने हैं जो मय-कदा बर-दोश हैं यारों के बीच

'तर्ज़' पढ़ता है कोई जब झूम कर नज़्म ओ ग़ज़ल
ऐसा लगता है 'फ़िराक़' ओ 'जोश' हैं यारों के बीच
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Ganesh Bihari Tarz
रह-ए-इश्क़ में ग़म-ए-ज़िंदगी की भी ज़िंदगी सफ़री रही
कभी नज़्र-ए-ख़ाक-ए-सफ़र रही कभी मोतियों से भरी रही

तिरी इक निगाह से साक़िया वो बहार-ए-बे-ख़बरी रही
गुल-ए-तर वही गुल-ए-तर रहा वही डाल डाल हरी रही

तिरी बे-रुख़ी की निगाह थी कि जो हर ख़ता से बरी रही
मिरी आरज़ू की शराब थी कि जो जाम जाम भरी रही

दम-ए-मर्ग भी मिरी हसरतें हद-ए-आरज़ू से न बढ़ सकीं
उसी काले देव की क़ैद में मिरे बचपने की परी रही

दिल-ए-ग़म-ज़दा पे गुज़र गया है वो हादसा कि मिरे लिए
न तो ग़म रहा न ख़ुशी रही न जुनूँ रहा न परी रही

वही 'तर्ज़' तुझ पे रहीम है ये उसी का फ़ैज़-ए-करीम है
कि असातिज़ा के भी रंग में जो ग़ज़ल कही वो खरी रही
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