vo jo ek chehra damak raha hai jamaal se | वो जो एक चेहरा दमक रहा है जमाल से

  - Yashab Tamanna

वो जो एक चेहरा दमक रहा है जमाल से
उसे मिल रही है ख़ुशी किसी के ख़याल से

मैं ने सिर्फ़ एक ही दाएरे में सफ़र किया
कभी बे-नियाज़ भी कर मुझे मह-ओ-साल से

कभी हँस के ख़ुद ही गले से उस को लगा लिया
कभी रो दिए हैं लिपट के ख़ुद ही मलाल से

तुझे क्या ख़बर कि वो कौन है सर-ए-रहगुज़र
कभी सरसरी न गुज़र किसी के सवाल से

वो जो मुस्कुरा के गुज़र रहा है क़रीब से
उसे आश्नाई ज़रूर है मेरे हाल से

मुझे आसरा भी नहीं किसी की दुआओं का
मुझे ख़ौफ़ आता है यूँँ भी वक़्त-ए-ज़वाल से

'यशब' अपने आप से मिल के कितना भला लगा
मुझे फ़ुर्सतें ही नहीं मिलीं कई साल से

  - Yashab Tamanna

Tasawwur Shayari

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