Yashab Tamanna

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Yashab Tamanna shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Yashab Tamanna's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

करने को कुछ नहीं है नए साल में 'यशब' क्यूँ न किसी से तर्क-ए-मोहब्बत ही कीजिए — Yashab Tamanna

Ghazal

कुछ भी नहीं है पास मिरे अब सिवाए याद शो'ला सा जल रहा है दर-ए-दिल मताअ'-ए-याद तन्हाइयों में भी कभी तन्हा नहीं हूँ मैं आ बैठती है पास मिरे बिन-बुलाए याद शब-भर मैं लुत्फ़ लेता रहा हूँ इसी तरह सारी ही रात चलती रही है हवा-ए-याद ऐसे बिछड़ कि दिल में कोई बात रह न जाए क्या जानिए कि फिर कभी आए न आए याद थक हार के वो मेरे ही पहलू में सोएगी दिन भर जो मारी मारी फिरी साए साए याद क्या हाल कर लिया है ज़रा हाल-ए-दिल कहो पहले तो तुम नहीं थे कभी मुब्तला-ए-याद मैं कर तो लूँगा तर्क-ए-मोहब्बत मगर 'यशब' मुमकिन नहीं कि उस की मिरे दिल से जाए याद — Yashab Tamanna
ऐसा भी नहीं दर्द ने वहशत नहीं की है इस ग़म की कभी हम ने इशाअत नहीं की है जब वस्ल हुआ उस से तो सरशार हुए हैं और हिज्र के मौसम ने रिआ'यत नहीं की है जो तू ने दिया उस में इज़ाफ़ा ही हुआ है इस दर्द की दौलत में ख़यानत नहीं की है हम ने भी अभी खोल के रक्खा नहीं दिल को तू ने भी कभी खुल के वज़ाहत नहीं की है इस शहर-ए-बदन के भी अजब होते हैं मंज़र लगता है अभी तुम ने सियाहत नहीं की है इस अर्ज़-ए-तमन्ना में किसे चैन मिला है दिल ने मगर इस ख़ौफ़ से हिजरत नहीं की है ये दिल के उजड़ने की अलामत न हो कोई मिलने पे घड़ी-भर को भी हैरत नहीं की है — Yashab Tamanna
रोता हुआ वो बाम मुझे याद है अभी दिल में बिखरती शाम मुझे याद है अभी फिर कैसे हो गया है वही शख़्स इतना ख़ास समझे थे जिस को आम मुझे याद है अभी हम और साथ साथ कभी इस तरह मिलें जैसे ख़याल-ए-ख़ाम मुझे याद है अभी वो गुफ़्तुगू निगाहों निगाहों में याद है सरगोशी में सलाम मुझे याद है अभी कैसे सँभल सँभल के बड़ा देख-भाल कर हम तुम थे हम-कलाम मुझे याद है अभी क्या दिन थे ख़्वाहिशों की बड़ी रेल-पेल थी जज़्बों का इज़िदहाम मुझे याद है अभी पूछा कि मेरे दिल में इक़ामत है कब तलक उस ने कहा मुदाम मुझे याद है अभी पूछा कि ज़िंदगी में मिरा हम-सफ़र है कौन मैं ने कहा ग़ुलाम मुझे याद है अभी अब तक वो ज़ाइक़ा भी मुझे याद है 'यशब' हम ने पिया था जाम मुझे याद है अभी — Yashab Tamanna
वो जो एक चेहरा दमक रहा है जमाल से उसे मिल रही है ख़ुशी किसी के ख़याल से मैं ने सिर्फ़ एक ही दाएरे में सफ़र किया कभी बे-नियाज़ भी कर मुझे मह-ओ-साल से कभी हँस के ख़ुद ही गले से उस को लगा लिया कभी रो दिए हैं लिपट के ख़ुद ही मलाल से तुझे क्या ख़बर कि वो कौन है सर-ए-रहगुज़र कभी सरसरी न गुज़र किसी के सवाल से वो जो मुस्कुरा के गुज़र रहा है क़रीब से उसे आशनाई ज़रूर है मेरे हाल से मुझे आसरा भी नहीं किसी की दु'आओं का मुझे ख़ौफ़ आता है यूँँ भी वक़्त-ए-ज़वाल से 'यशब' अपने आप से मिल के कितना भला लगा मुझे फ़ुर्सतें ही नहीं मिलीं कई साल से — Yashab Tamanna