कुछ भी नहीं है पास मिरे अब सिवाए याद

शो'ला सा जल रहा है दर-ए-दिल मताअ'-ए-याद

तन्हाइयों में भी कभी तन्हा नहीं हूँ मैं
आ बैठती है पास मिरे बिन-बुलाए याद

शब-भर मैं लुत्फ़ लेता रहा हूँ इसी तरह
सारी ही रात चलती रही है हवा-ए-याद

ऐसे बिछड़ कि दिल में कोई बात रह न जाए
क्या जानिए कि फिर कभी आए न आए याद

थक हार के वो मेरे ही पहलू में सोएगी
दिन भर जो मारी मारी फिरी साए साए याद

क्या हाल कर लिया है ज़रा हाल-ए-दिल कहो
पहले तो तुम नहीं थे कभी मुब्तला-ए-याद

मैं कर तो लूँगा तर्क-ए-मोहब्बत मगर 'यशब'
मुमकिन नहीं कि उस की मिरे दिल से जाए याद

— Yashab Tamanna

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Yaad Shayari

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