बे-सबब उस के नाम की मैं नेकाट तो ली थी ज़िंदगी मैं नेवो मुझे ख़्वाब में नज़र आयाऔर तस्वीर खींच ली मैं नेआप का काम हो गया आक़ालाश दरिया में फेंक दी मैं नेखेल तू इस लिए भी हारेगाचाल चलनी है आख़िरी मैं नेएक वो बे-हिजाब और उस परडाल रक्खी थी रौशनी मैं ने— Zia Mazkoor