vaqt hi kam tha faisley ke li.e | वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए

  - Zia Mazkoor

वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए

तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए

घंटों ख़ामोश रहना पड़ता है
आप के साथ बोलने के लिए

सैकड़ों कुंडियाँ लगा रहा हूँ
चंद बटनों को खोलने के लिए

एक दीवार बाग़ से पहले
इक दुपट्टा खुले गले के लिए

तर्क अपनी फ़लाह कर दी है
और क्या हो मुआशरे के लिए

लोग आयात पढ़ के सोते हैं
आप के ख़्वाब देखने के लिए

अब मैं रस्ते में लेट जाऊँ क्या
जाने वालों को रोकने के लिए

  - Zia Mazkoor

Hug Shayari

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