mujhko naya bharam de naya saal dar pe hai | मुझको नया भरम दे नया साल दर पे है

  - 100rav

मुझको नया भरम दे नया साल दर पे है
इक बे-वफ़ा सनम दे नया साल दर पे है

अच्छी ग़ज़ल तराशे ज़माना हुआ है अब
कोई नया ही ग़म दे नया साल दर पे है

जितने मिले थे दर्द रक़म कर दिए सभी
ग़म की नई क़लम दे नया साल दर पे है

वो शे'र सुनके वाह है करती ये रहम क्यूँ
शाइर को बस सितम दे नया साल दर पे है

वा'दा शराब छोड़ने का है दिया उसे
यारा शराब कम दे नया साल दर पे है

  - 100rav

Dar Shayari

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