100rav
100rav
Ghazal

मुझ को नया भरम दे नया साल दर पे है

इक बे-वफ़ा सनम दे नया साल दर पे है

अच्छी ग़ज़ल तराशे ज़माना हुआ है अब
कोई नया ही ग़म दे नया साल दर पे है

जितने मिले थे दर्द रक़म कर दिए सभी
ग़म की नई क़लम दे नया साल दर पे है

वो शे'र सुनके वाह है करती ये रहम क्यूँ
शाइ'र को बस सितम दे नया साल दर पे है

वा'दा शराब छोड़ने का है दिया उसे
यारा शराब कम दे नया साल दर पे है

— 100rav

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