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उम्र भर मुझको रखा धूप में जिस रस्ते ने - Aditya

उम्र भर मुझको रखा धूप में जिस रस्ते ने
याद क्यूं उसका सफ़र और वो छाले रक्खूँ

ख़त जो लिख कर के रखा पर न तुम्हें दे पाया
अब उसे आग लगा दूँ या सँभाले रक्खूँ

Aditya
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Safar Shayari

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