यहाँ तेरी महक रह जाए तो अच्छा

गुलाबों में धड़क रह जाए तो अच्छा

नहीं है ठीक इस को यूँ बयाँ करना
ग़मे-दिल दिल तलक रह जाए तो अच्छा

ये वादें बस लबों तक आके रुक जाएँ
मुहब्बत में झिझक रह जाए तो अच्छा

ज़रा कमज़ोर दिल वालों का क़िस्सा है
ये क़िस्सा वस्ल तक रह जाए तो अच्छा

मेरी पलकों में आँसू किस सितम के हैं
ये बस राज़े-पलक रह जाए तो अच्छा

अभी मुझ को ज़रा सा और जीना है
सो दिल में कुछ कसक रह जाए तो अच्छा

— Aasira Naaz

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