sabhi ko hi pa | सभी को ही पड़ी अपने दुखों की

  - Aqib khan

सभी को ही पड़ी अपने दुखों की
यहाँ पर बात हो किसके दुखों की

कम-अज़-कम दिल सही से तोड़ जाते
हमें आदत नहीं हल्के दुखों की

किसी के छोड़ जाने पर भी ख़ुश हो
तुम्हें पहचान है अच्छे दुखों की

वो मुझ सेे दस मिनट में भाग निकला
कहानी जानकर मेरे दुखों की

हमेशा रोने को तैयार है वो
कोई बस बात तो छेड़े दुखों की

कोई दुख में ही रोता रह गया है
ग़ज़ल कह दी है शा'इर ने दुखों की

  - Aqib khan

Aah Shayari

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