तुम्हें आने दिया उसने यूँँ दरबार-ए-मुहब्बत में
कहीं अब क़त्ल मत हो जाना दीदार-ए-मुहब्बत में
हमें तो देखना था चाँद को यार-ए-मुहब्बत में
अकेले गिन रहे हैं बैठकर तारे मुहब्बत में
मेरा बाबू मेरा बच्चा मेरा शोना मेरा बेबी
ये क्या क्या बन रहे हैं सारे के सारे मुहब्बत में
मुहब्बत कर रहे हो तुम तो ये भी ध्यान में रखना
फक़त लज़्ज़त नहीं है दर्द भी प्यारे मुहब्बत में
वही ऊदम वही ग़ुस्सा वही ग़मगीन सी आँखें
हमारी ही तरह क्या आप भी हारे मुहब्बत में
चलो जल्दी चलो आकिब, वहाँ दुखड़े सुनेंगे हम
इकट्ठे हो रहे हैं इक जगह मारे मुहब्बत में
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