
तुम इस पे ख़फ़ा हो के मैं ने बात नहीं की
ये कम है के इन आँखों ने बरसात नहीं की
अपने ग़मों को ख़ुद ही समेटे हुए हैं हम
मुश्किल से कमाए हैं सो ख़ैरात नहीं की
— Aqib khan
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