अगर तुम कहो हम बदल जाते हैं जी
हैं पत्थर मगर हम पिघल जाते हैं जी
अमीरी बुलंदी की चाहत न थी सो
ग़रीबी-फ़क़ीरी में पल जाते हैं जी
सभी गीत उन पर ना थे पर हुआ यूँ
सभी गीत में वो तो ढल जाते हैं जी
ख़ता मेरी इस
में नहीं थोड़ी सी भी
सभी को भले लोग खल जाते हैं जी
— Alankrat Srivastava















