मोहब्बत है होती जहाँ हौले हौले
कि लो आ गए हम वहाँ हौले हौले
तू ने तीरगी में जला कर के दीपक
सजाया ये मेरा जहाँ हौले हौले
सुनो तो सिखा दूँ सलीक़े मोहब्बत
चली जाना, पर यार, हाँ! हौले हौले
तबाही चली भी गई सब चुरा कर
बुलंदी है आती यहाँ हौले हौले
ये जीवन कि कश्ती में साँसों कि सरगम
है गुम हो गई सब कहाँ हौले हौले
— Alankrat Srivastava















