आइना अपने दिल का साफ़ किया
जा तुझे मैने अब मुआफ़ किया
मैंने तो तेरा एतिराफ़ किया
और तूने ही इख़्तिलाफ़ किया
शब-ए-फ़ुर्क़त थी सर्द सो हमने
वस्ल के ख़्वाब को लिहाफ़ किया
चाँद करता है ज्यूँ ज़मीं का तवाफ़
तेरे कूचे का यूँँ तवाफ़ किया
'इश्क़ से हमने आशनाई की
तूने बस ऐन शीन क़ाफ़ किया
इक परी-रू ने दिल में हो के मकीं
दिल मेरा जैसे कोह-ए-क़ाफ़ किया
करनी थी जो नमाज़े-इश्क़ अदा
हमने सहरा में ऐतेकाफ़ किया
ये सुकूँ एहतिजाज करने लगा
फ़ैसला दिल के क्यूँ खिलाफ़ किया
ना-उमीदी की तीरगी में 'अनीस'
एक उम्मीद ने शिगाफ़ किया
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