हम सर-ए-बज़्म यूँँ गुफ़्तार नहीं कर सकते
अपने रिश्ते को तो अख़बार नहीं कर सकते
रोज़ा रक्खा है हमारी भी तो इन आँखों ने
बिना दीदार के इफ़्तार नहीं कर सकते
सिर्फ़ सीने को निशाना ही बनाते हरदम
पीठ पर हम तो कभी वार नहीं कर सकते
कोई सोया है तो हम उस को जगा सकते हैं
जागता हो उसे बेदार नहीं कर सकते
किस को कहते हैं अदब ख़ूब हमें आता है
तेरे क़दमों में ये दस्तार नहीं कर सकते
अपने भाई को हराने के लिए हरगिज़ ही
उस के दुश्मन को तरफ़दार नहीं कर सकते
क्या फ़राइज़ हैं अनीस अपने हमें है मालूम
तेरे जल्वों का तलबगार नहीं कर सकते
— Anis shah anis















