"ज़िम्मेदार हो तुम"

एक ख़्वाब जो हम ने देखा था‬
‪इक दिल जिस
में तुम रहते थे‬

वो ख़्वाब मुकम्मल हो न सका‬
‪वो दिल भी तुम ने तोड़ दिया‬

टूटे दिल ने बेचैन किया‬
‪और नींद से रिश्ता टूट गया‬

जब नींद से रिश्ता टूट गया‬
‪तो ख़्वाब भी हम से रूठ गया‬

जब नींद नहीं,
तो ख़्वाब नहीं
‪एक ख़्वाब गया, एक दिल टूटा‬

दोनो के ज़िम्मेदार हो तुम‬

— Armaan khan

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