तुम्हारी दी हुई हर इक निशानी को बचा लाया
सितम सहती हुई आँखों के पानी को बचा लाया
मिरे दिल को सभी ने ख़ूब घेरा था मगर फिर भी
किसी की याद की मैं राजधानी को बचा लाया
ज़माने में हमारी ये कहानी एक क़िस्सा थी
नहीं क़िस्सा बचा तो मैं कहानी को बचा लाया
सराबे-इश्क़ जब मुझ पर खुला तो और क्या करता
नहीं दरिया बचा तो मैं रवानी को बचा लाया
— Ayush Gupta














