रहेगी दोस्ती कब तक फ़क़त ये आशिक़ी कब तक

भला खेलेगी हम से इस तरह ये ज़िन्दगी कब तक

बिता दी हम ने शा
में-हिज्र तन्हाई को जी कर के
बता भी दो रहेगी दिल में ये नाराजगी कब तक

कभी तो लौट कर आए मुझे महबूब का ख़त भी
फ़क़त करते रहेंगें ख़त में हम ही शा'इरी कब तक

शजर इक कट गया उन की नज़र के सामने ही फिर
खलेगी इन परिंदों को भला ये ख़ामुशी कब तक

फ़क़त रिश्ते निभाने का दिखावा करते हो क्यूँ तुम
भला ये कैसी यारी, हम रहेंगें अजनबी कब तक

— Das Kanpuri

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